खूबसूरत विहान हो जाये
चम्पई आसमान हो जाये।
तुम जो बस एक बार आ जाओ
जिंदगी प्राणवान हो जाए।
पाँव अब तक थे इस धरातल पर
अब चलो इक उड़ान हो जाये ।
झूठ का जीतना नहीं सम्भव
सच भरा यदि बयान हो जाये ।
~लोकेन्द्र मणि मिश्र '"दीपक"'
खूबसूरत विहान हो जाये
चम्पई आसमान हो जाये।
तुम जो बस एक बार आ जाओ
जिंदगी प्राणवान हो जाए।
पाँव अब तक थे इस धरातल पर
अब चलो इक उड़ान हो जाये ।
झूठ का जीतना नहीं सम्भव
सच भरा यदि बयान हो जाये ।
~लोकेन्द्र मणि मिश्र '"दीपक"'
हमले पर हमले होते हैं कश्मीर की वैली में
कुछ भी तल्ख नही दिखता है पी एम जी की शैली में।
राजनाथ जी भी निंदा पर निंदा करते जाते हैं
और हमारे वीर सदा सीमा पर मरते जाते हैं।
रोज रोज ये निंदारस का पाठ पढाना बन्द करो
दुष्ट पाक से मैदां में आ जाओ खुलकर द्वन्द करो।
~लोकेन्द्र मणि मिश्र "दीपक"
दुश्मन को भी दोस्त बनाना आता है
रूठ के देखो मुझे मनाना आता है।
दर्द छुपा जो लाख हमारे सीने में
महफ़िल में लेकिन मुस्काना आता है।
भूखे मर जाते हैं जब फुटपाथों पर
तब जाके सरकारी खाना आता है।
पत्थर भी पिघले हैं, सुर से तानों से
चलो दिखा दो तुमको गाना आता है।
हार नहीं मानूँगा कभी अँधेरे से
"दीपक" हूँ मैं तिमिर मिटाना आता है।
~लोकेन्द्र मणि मिश्र "दीपक"