शनिवार, 13 अक्टूबर 2018

मुझको तुझमें चाँद दिखाई देता है

देख रहा हूँ कल से तेरी आँखों में
इन आँखों में प्यार दिखाई देता है।

तेरी जुल्फें आगे को जब होती हैं
मुझको तुझमे ताज दिखाई देता है।

तेरे लब  को  छूकर मैंने जाना है
प्यासे को क्यों आब दिखाई देता है।

सबको तुझमे सबकुछ दिखता होगा पर
मुझको तुझमे चाँद दिखाई देता है।

~लोकेन्द्र मणि मिश्र "दीपक"

रविवार, 2 सितंबर 2018

प्यार ही प्यार- प्यार कान्हा

1- जगत को रस्ता दिखाने आया धरा पे नर रूप धार कान्हा
भक्ति का योग कर्म का योग सिखाने आया था प्यार कान्हा
ये जग समझ ले न धन को सब कुछ और भूल जाए न मन की बातें
यही बताने धरा पे आया सुदामा का बन के यार कान्हा।

2-जगत को अपने स्वरुप - लीला से था लुभाने ही आया कान्हा
है सत्य आत्मा जगत है मिथ्या हमें बताने ही आया कान्हा
कभी किसी को न समझो छोटा नहीं वो छोटे जो दिख रहे है
कि पांच पांडव के संग मिल कर उन्हें जिताने ही आया कान्हा।

3 हज़ारों गोपियों  संग राधा व रुकमिनी का सिंगार कान्हा
जो राधिका को था उनसे जोड़े वो मन से मन का था तार कान्हा
वो चाहे मीरा हो या कि राधा या गोपियाँ हो या मित्र ही हों
सकल चराचर को आया देने था प्यार ही प्यार - प्यार कान्हा।

©लोकेन्द्र मणि मिश्र " दीपक"

शुक्रवार, 18 मई 2018

पतवार छोड़ दोगे तो साहिल न मिलेगा

पतवार छोड़ दोगे तो साहिल न मिलेगा।
अखबार में कातिल कभी कातिल न मिलेगा।

मिल जाये एक बार तो फिर थाम लो उसे
हर बार किसी से ये कभी दिल न मिलेगा।

शब आई है तो आएगी निश्चित ही सहर भी
ये बात सच नहीं है कि झिलमिल न मिलेगा।

सुधियों में तेरे जिस तरह खोया रहा हूँ मैं
हर शख़्स तुम्हे इस क़दर ग़ाफ़िल न मिलेगा।

"दीपक" के हौंसले को डिगा दे कोई तूफां
तूफान कोई इतना तो काबिल न मिलेगा।

~लोकेन्द्र मणि मिश्र "दीपक"