शनिवार, 13 जुलाई 2019

टूटा हुआ एक सपना

ये किस्से जो अक्सर सुनाता हूँ उनमें
है शामिल फ़क़त रूह, जिस्म नहीं हैं।
नहीं यार कोई कहानी नहीं है
तुम्हें दिख रहा है  जो आँखों में पानी
अरे यार वो कोई पानी नहीं है।
ये मुमकिन है पलकों के बांधो से रिसकर
कोई ख्वाब पानी का हमशक्ल हो कर
किसी एक कोने  को नम कर रहा हो
और आँखों से एक ख्वाब कम कर रहा हो
ये कहते हैं अब मुझको आज़ाद कर दो।
अरे यार हद है!
जो दिल्ली की आबो हवा में रहोगे
और सीपी की सड़कों पे भटका  करोगे।
किसी हाथ में हाथ को देखकर जब
अंदर ही अंदर से सिसका करोगे
उसी  दिन पता फिर चलेगा तुम्हे ये
की सच में ये कोई कहानी नहीं है
जो आँखों से निकला , वो पानी नहीं है।
किसी रात को सोते  सोते अचानक
जो सपने में चेहरा कोई देख लोगे
उठोगे तो टूटा हुआ एक सपना
कहेगा किसी और के साथ हूँ मैं।।
यूँ ही ज़िन्दगी के हरेक मोड़ पर जब
वही ख्वाब आँखों से रिसता रहेगा
कोई दर्द ताउम्र चुभता रहेगा
उसी  दिन पता फिर चलेगा तुम्हे ये
की सच में ये कोई कहानी नहीं है
जो आँखों से निकला , वो पानी नहीं है।

~लोकेन्द्र मणि मिश्र"दीपक"

शनिवार, 1 जून 2019

UPPSC/UPSSSC: भ्रष्टाचार, छात्रो का भविष्य और तुलसीदास की प्रासंगिकता


कोउ नृप होउ हमहि का हानी।
चेरि छाड़ि अब होब कि रानी॥

तुलसी बाबा की प्रासंगिकता किसी समयकाल में कम नहीं होने वाली।
इलाहाबाद की सडको पर प्रतियोगी छात्रों पर प्रशासन द्वारा डंडे बरसाना तुलसी के उपरोक्त दोहे की वर्तमान प्रासंगिता सिद्ध करता है। देश में एक नयी सरकार है जिसे जनता ने चुना है।स्पष्ट बहुमत की सरकार लचर विपक्ष और देश में व्यक्तिवाद के पूजन के इस सुनहरे दौर में आइये हम मन्दिर- मस्जिद, काशी- काबा खेल लें। छात्रों पर फिर कभी ध्यान देंगे या न भी दें तो चलेगा। कारण? कारण वही भक्ति है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग तथा उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के साथ यह पहली बार नहीं हुआ जब उंगली उठी हो। ऐसा होता रहा है। पिछले 3-4 वर्षों ने शायद ही उत्तर प्रदेश में कोई परीक्षा हुई हो जिसमे पेपर लीक न हुआ हो या सोल्वर गैंग के पकड़े जाने की खबरे न आई हो।
वर्तमान में परीक्षा नियन्त्रक अंजू कटिहार  के गिरफ्तारी होने के बाद लगभग 10 परिक्षाएं टल गयी हैं। हमारे यहाँ परम्परा है 17  का मैन्स 18 में इंटरव्यू 19 में एंड सो ऑन....
UPSSSC में एक फॉर्म निकलता है 2016 में जुनियर अस्सिटेंट का परीक्षा होती है, स्किल टेस्ट होता है इंटरव्यू होता है फिर सरकार बदलती है दुबारा एक साल के इंतज़ार के बाद इंटरव्यू होता है फिर 2019 में ज्वाइनिंग होती है। एक क्लर्क लेवल का एग्जाम आप तीन साल में पूरा कराते हैं। इन तीन वर्षों में उन छात्रों के मानसिक स्थिति के बारे में सोचा आपने? एक क्लर्क बनने के लिए तीन चरणों की परीक्षा में दो- दो बार इंटरव्यू देकर कोई छात्र तीन वर्ष बाद पोस्टेड होता है तो वह बहुत कुछ देख चुका होता है इन तीन वर्षों में।उन तीन वर्षो के मानसिक कष्ट का रत्ती भर अन्दाजा कुर्सी पर बैठे न तबके भईया को हुआ ना अबके बाबा जी को। जहां PCS की परीक्षा में evening शिफ्ट का पेपर मॉर्निंग शिफ्ट में बाँट दिया जाता है वहां क्या ही भरोसा किया जाए।
4-5 वर्षों में प्री, मैन्स, इंटरव्यू, हाई कोर्ट , सुप्रीम कोर्ट , डबल बेंच ,ट्रिपल बेंच आदि जैसे कई प्रक्रियाओं के बाद यदि आपके अन्दर धैर्य बचा है और देश के लिए कुछ करने की सोच अब भी बची हुई है तो फिर आईये आयोग का द्वार आपके लिये ही है। इन 4-5 वर्षों में आप शायद एक अधिकारी तो बन जाएं पर क्या आप ज़िंदगी में बहुत कुछ खो नहीं चुके होंगे दोस्तों के साथ बिताने वाले समय, परिवार के साथ कुछ पल, अपने खास भाइयों- बहनों- दोस्तों की शादी और भी क्या- क्या...

जो भी हो आयोग बदले ना बदले हमें हौंसला रखना होगा एक सुनहरे कल के लिए, खुद को साबित करने के लिए और अपने सपनों के लिए जिसे शायद आपने अकेले या किसी के साथ देखा हो।
अंत में यही कहुंगा..

शब आई है तो आएगी निश्चित ही सहर भी
ये बात सच नहीं है कि झिलमिल न मिलेगा।

"दीपक" कि हौंसले को डिगा दे कोई तूफ़ां
तूफ़ान कोई इतना तो काबिल न मिलेगा।

~लोकेन्द्र मणि मिश्र "दीपक"

गुरुवार, 11 अप्रैल 2019

मेरी दुनिया में आकर फिर दुनिया से जाता ताजमहल

मैंने देखा एक ताजमहल
हंसता- मुस्काता ताजमहल
बाहों में आता ताजमहल
जुल्फें बिखराता ताजमहल।

एक पल में दुनिया में आकर
दुनिया बन जाता ताजमहल
तुमने देखा चुप ताजमहल
हमने बतियाता ताजमहल।

जग से बिलकुल ही जुदा- जुदा
खुद पर इतराता ताजमहल
मेरे हाथों पर उंगली से
एक चित्र बनाता ताजमहल।

मेरी दुनिया में संग मेरे
मुझमे खो जाता ताजमहल
अपने सपनों की एक फसल
मुझमे बो जाता ताजमहल।

देखा मैंने मुझपर अपना
अधिकार जताता ताजमहल
बस एक हँसी में ले जाता
हर दर्द चुराता ताजमहल।

तुमने पत्त्थर वाला देखा
मैंने मिट्टी का ताजमहल
कंधे पर मेरे सर रखकर
आंसू बरसाता ताजमहल।

देखा मैंने चलकर आते
फिर देखा जाता ताजमहल
एक दिन मेरी एक गलती पर
मुझसे गुस्साता ताजमहल।
I
पहले बतियाते देखा था
फिर चुप हो जाता ताजमहल
मेरी दुनिया में आकर फिर
दुनिया से जाता ताजमहल।

पहले था साथ हक़ीकत में
अब ख्वाब में आता ताजमहल
होठों पर कुसुम खिलाकर फिर
आंसू दे जाता ताजमहल ।

पहले चलता था साथ मगर
अब राह दिखाता ताजमहल
आने जाने वाली दुनिया
मुझको दिखलाता ताजमहल।

अब भी ऐसा लगता है कि""
मुझको अपनाता ताजमहल
आकर कहता एक बार पुनः
कानो में "दीपक" ताजमहल।

~लोकेन्द्र मणि मिश्र "दीपक"