मंगलवार, 1 अक्टूबर 2019

अथ् श्री UPSSSC कथा

अथ् श्री UPSSSC कथा

ये एक पेपर भर नहीं है बल्कि लाखों छात्र - छात्राओं का भरोसा है जो हर रोज थोड़ा -थोड़ा  लीक हो रह है।

उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के द्वारा "लोअर पी सी एस" की परीक्षा कराई गई। दो दिन क्रमशः दो - दो शिफ्टस् में परीक्षा हुई। जैसा कि परिक्षाओं में होता है बेल्ट, घडी आदि नहीं ले जा सकते तो वो इसमें भी हुआ। प्रदेश में एक योगी मुख्यमंत्री हैं और देश में कर्मयोगी प्रधानमंत्री हैं। देश में विकास संतृप्त अवस्था में पहुँच गया है। संतृप्त अवस्था का सीधा मतलब समझ लीजिये कि विकास इतना हो चुका है कि अब और विकास संभव ही नहीं है। कुछ महीने पहले ग्राम विकास अधिकारी का पेपर हुआ था । जैसे कि सबको पता है प्रश्नपुस्तिका भी जमा कर ली जाती है परीक्षा के बाद और जिस परीक्षा भवन में आप बेल्ट और घड़ी तक नहीं ले जा सकते वहां से पेपर का फोटो खींच के वायरल हो जाता है। ठीक वैसे ही लोअर के एग्जाम में हुआ ३० सितम्बर के फर्स्ट शिफ्ट का पेपर व्हाट्सऐप, फेसबुक पर घूम रहा है। ये पेपर महज कुछ प्रश्न नहीं है बल्कि लाखों छात्रों का टूटता हुआ भरोसा है। कुछ लोग ज्ञान देंगे की इसमें सरकार को क्या दोष!कृपया वो लोग दूर ही रहें और टीवी पर कब होगा पाकिस्तान पर हमला और जैसे प्रोग्राम देखें।

कभी सेकंड  शिफ्ट का पेपर फर्स्ट शिफ्ट में बाँट दिया( PCS २०१७- GIC इलाहाबाद) जाता है कभी पेपर आउट हो जाता है मतलब हद है लापारवाही की। नकल रोकने के नाम पर बनारस वालों को सेण्टर गाज़ियाबाद और मेरठ  वालों का सेण्टर बनारस भेजा जा रहा है और फिर भी कोई असर नहीं। सही है सब रामराज आ गया है, भारत की GDP विश्व के GDP के दो गुनी हो गई है, देश में बुलेट ट्रैन दौड़ रही है बनारस से मेरठ  जाने वाले छात्र चैन पुल्लिंग कर के बैठ जाएं जल्दी से।

सब चंगा सी!
Everything is fine!

~लोकेन्द्र मणि मिश्रा "दीपक"

गुरुवार, 26 सितंबर 2019

हमें उस मोड़ पर लायी वो लड़की

हमारे दरमिया कुछ था अगर तो
कदम या दो कदम का फासला था।

हमें उस वक़्त छोड़ा था किसी ने
हमें जिस वक़्त उससे राब्ता था।

हमारी आँख से निकला था सपना
हमें बस आँख भर से वास्ता था।

हमें उस मोड़ पर लायी वो लड़की
जहाँ ना रहगुज़र ना रास्ता  था।

चलो अच्छा हुआ कुछ ख्वाब टूटे
हकीक़त में यही वो चाहता था।

©लोकेन्द्र मणि मिश्र "दीपक"

शनिवार, 13 जुलाई 2019

टूटा हुआ एक सपना

ये किस्से जो अक्सर सुनाता हूँ उनमें
है शामिल फ़क़त रूह, जिस्म नहीं हैं।
नहीं यार कोई कहानी नहीं है
तुम्हें दिख रहा है  जो आँखों में पानी
अरे यार वो कोई पानी नहीं है।
ये मुमकिन है पलकों के बांधो से रिसकर
कोई ख्वाब पानी का हमशक्ल हो कर
किसी एक कोने  को नम कर रहा हो
और आँखों से एक ख्वाब कम कर रहा हो
ये कहते हैं अब मुझको आज़ाद कर दो।
अरे यार हद है!
जो दिल्ली की आबो हवा में रहोगे
और सीपी की सड़कों पे भटका  करोगे।
किसी हाथ में हाथ को देखकर जब
अंदर ही अंदर से सिसका करोगे
उसी  दिन पता फिर चलेगा तुम्हे ये
की सच में ये कोई कहानी नहीं है
जो आँखों से निकला , वो पानी नहीं है।
किसी रात को सोते  सोते अचानक
जो सपने में चेहरा कोई देख लोगे
उठोगे तो टूटा हुआ एक सपना
कहेगा किसी और के साथ हूँ मैं।।
यूँ ही ज़िन्दगी के हरेक मोड़ पर जब
वही ख्वाब आँखों से रिसता रहेगा
कोई दर्द ताउम्र चुभता रहेगा
उसी  दिन पता फिर चलेगा तुम्हे ये
की सच में ये कोई कहानी नहीं है
जो आँखों से निकला , वो पानी नहीं है।

~लोकेन्द्र मणि मिश्र"दीपक"