शनिवार, 1 जून 2019

UPPSC/UPSSSC: भ्रष्टाचार, छात्रो का भविष्य और तुलसीदास की प्रासंगिकता


कोउ नृप होउ हमहि का हानी।
चेरि छाड़ि अब होब कि रानी॥

तुलसी बाबा की प्रासंगिकता किसी समयकाल में कम नहीं होने वाली।
इलाहाबाद की सडको पर प्रतियोगी छात्रों पर प्रशासन द्वारा डंडे बरसाना तुलसी के उपरोक्त दोहे की वर्तमान प्रासंगिता सिद्ध करता है। देश में एक नयी सरकार है जिसे जनता ने चुना है।स्पष्ट बहुमत की सरकार लचर विपक्ष और देश में व्यक्तिवाद के पूजन के इस सुनहरे दौर में आइये हम मन्दिर- मस्जिद, काशी- काबा खेल लें। छात्रों पर फिर कभी ध्यान देंगे या न भी दें तो चलेगा। कारण? कारण वही भक्ति है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग तथा उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के साथ यह पहली बार नहीं हुआ जब उंगली उठी हो। ऐसा होता रहा है। पिछले 3-4 वर्षों ने शायद ही उत्तर प्रदेश में कोई परीक्षा हुई हो जिसमे पेपर लीक न हुआ हो या सोल्वर गैंग के पकड़े जाने की खबरे न आई हो।
वर्तमान में परीक्षा नियन्त्रक अंजू कटिहार  के गिरफ्तारी होने के बाद लगभग 10 परिक्षाएं टल गयी हैं। हमारे यहाँ परम्परा है 17  का मैन्स 18 में इंटरव्यू 19 में एंड सो ऑन....
UPSSSC में एक फॉर्म निकलता है 2016 में जुनियर अस्सिटेंट का परीक्षा होती है, स्किल टेस्ट होता है इंटरव्यू होता है फिर सरकार बदलती है दुबारा एक साल के इंतज़ार के बाद इंटरव्यू होता है फिर 2019 में ज्वाइनिंग होती है। एक क्लर्क लेवल का एग्जाम आप तीन साल में पूरा कराते हैं। इन तीन वर्षों में उन छात्रों के मानसिक स्थिति के बारे में सोचा आपने? एक क्लर्क बनने के लिए तीन चरणों की परीक्षा में दो- दो बार इंटरव्यू देकर कोई छात्र तीन वर्ष बाद पोस्टेड होता है तो वह बहुत कुछ देख चुका होता है इन तीन वर्षों में।उन तीन वर्षो के मानसिक कष्ट का रत्ती भर अन्दाजा कुर्सी पर बैठे न तबके भईया को हुआ ना अबके बाबा जी को। जहां PCS की परीक्षा में evening शिफ्ट का पेपर मॉर्निंग शिफ्ट में बाँट दिया जाता है वहां क्या ही भरोसा किया जाए।
4-5 वर्षों में प्री, मैन्स, इंटरव्यू, हाई कोर्ट , सुप्रीम कोर्ट , डबल बेंच ,ट्रिपल बेंच आदि जैसे कई प्रक्रियाओं के बाद यदि आपके अन्दर धैर्य बचा है और देश के लिए कुछ करने की सोच अब भी बची हुई है तो फिर आईये आयोग का द्वार आपके लिये ही है। इन 4-5 वर्षों में आप शायद एक अधिकारी तो बन जाएं पर क्या आप ज़िंदगी में बहुत कुछ खो नहीं चुके होंगे दोस्तों के साथ बिताने वाले समय, परिवार के साथ कुछ पल, अपने खास भाइयों- बहनों- दोस्तों की शादी और भी क्या- क्या...

जो भी हो आयोग बदले ना बदले हमें हौंसला रखना होगा एक सुनहरे कल के लिए, खुद को साबित करने के लिए और अपने सपनों के लिए जिसे शायद आपने अकेले या किसी के साथ देखा हो।
अंत में यही कहुंगा..

शब आई है तो आएगी निश्चित ही सहर भी
ये बात सच नहीं है कि झिलमिल न मिलेगा।

"दीपक" कि हौंसले को डिगा दे कोई तूफ़ां
तूफ़ान कोई इतना तो काबिल न मिलेगा।

~लोकेन्द्र मणि मिश्र "दीपक"