शनिवार, 5 जनवरी 2019

यही मोहब्बत के मायने हैं...

हज़ारों गम हैं हमारे अन्दर बस एक ख़ुशी का पता नहीं है
वो कह रहा है मुझे पता है मगर उसे कुछ पता नहीं है।

हज़ारों लोगों की चीखे हैं और न जाने कितना है शोर अब भी
मगर जिसे सुनना चाहे ये दिल है सब मगर वो सदा नहीं है।

मैं तुमसे बातें भी अब न करता इसे गलत मत समझना जाना
हज़ारों बाते हैं पास मेरे मगर कहूं क्या पता नहीं है।

यही मोहब्बत के मायने हैं, ख़याल उसका ख़ुशी भी उसकी
तमाम हिस्सों में बंट चुका हूँ पर इसमें उसकी खता नहीं है।

न जाने कितना सहा है तुमने न जाने क्या दुनिया देख ली है
जो कुछ भी पूछो तो बोलती हो मुझे ये सब कुछ पता नहीं है।

मुझे वो मैसेज नहीं है मिलता "कहाँ बिजी हो" "क्या कर रहे हो"
मुझे पता है  जो कर  रही  हो ये तो  तुम्हारी अदा नहीं है।

~लोकेन्द्र मणि मिश्र "दीपक"

शनिवार, 22 दिसंबर 2018

दो नैन तुम्हारे ऐसे  जिनमे डूबे सात समंदर

दो नैन तुम्हारे ऐसे  जिनमे डूबे सात समंदर
कितनी बाते छुपी हुईं हैं इन नयनो के अंदर.
जैसे छोटा बच्चा कोई देखे एक खिलौना
जैसे नील गगन तारों का लगता एक बिछौना
जैसे सारी दुनिया की आपाधापी स्थिर हो
जैसे सुख दुःख वाली बातें इस दुनिया में चिर हो.

जैसे दुनिया के ख्वाबो की इसमें हो एक दुनिया
इस दुनिया से कितनी अच्छी है आँखों की दुनिया
इन आँखों की दुनिया का एक कोना लेकिन नम है
यूँ कह लें दो आँखों के बिन दो आँखे पुरनम हैं।
वो दो आँखे बसी हुई इन दो आँखों के अंदर
कितनी बातें छुपी हुई हैं दो आँखों के अंदर।

दो नैन इधर ऐसे हैं जो उन दो नयनो  को चाहें
उन नयनों को गहना चाहें इन नयनो की बाहें.
दो नैन तुम्हारे ऐसे  जिनमे डूबे सात समंदर
कितनी बाते छुपी हुईं हैं इन नयनो के अंदर.

~लोकेन्द्र मणि मिश्र "दीपक"

सोमवार, 22 अक्टूबर 2018

ज़िंदगी भी कमाल है मालिक

ज़िन्दगी भी कमाल है मालिक
इश्क़ मौलिक सवाल है मालिक।

जिसने देखा वो देखता ही रहा
कैसा हुश्न -ओ- जमाल है मालिक।

यूँ वो चलती है जैसे लगता है
एक नदिया की चाल है मालिक।

वो जो चन्दा के जैसा रौशन है
हुश्ने जाना का गाल है मालिक।

उसके लब पे जो मुस्कुराहट है
सच में बिलकुल बवाल है मालिक

लोकेन्द्र मणि मिश्र " दीपक"