गुरुवार, 18 फ़रवरी 2016

गज़ल

सज संवर कर पास आई है ग़ज़ल
दिल को मेरे आज भायी है गज़ल

थोड़े  शब्दों में  बड़ी  बातें कहे
कौन कहता है की राई है गजल

दिलजलों के दिल के सबसे पास है
कौन कहता है पराई है ग़जल

जा रहा हूँ आज उसके पास मैं
आज उसने फिर से गायी है गजल

तुम करो स्वीकार या फिर ना करो
दिल से "दीपक "नें बनाई है गज़ल

©®लोकेन्द्र मणि मिश्र "दीपक"
लखनऊ

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