शनिवार, 20 फ़रवरी 2016

गीतिका

आपस में एक दूजे से लड़ते कभी नही
नेता हमारे पीछे जो पड़ते कभी नहीं

दुनिया हमेशा उसके ही कदमो को चूमती
तिल भर भी जो सच्चाई से टलते कभी नहीं।

अपने परो पे चिड़िया का विश्वास देखिये
कारण यही है शाख से गिरते कभी नही।

औरो के रास्ते में जो कांटे है बो रहा
राहों में उसके फूल तो मिलते कभी नहीं

कुछ बात तो होगा ही जल रहे  चराग में
"दीपक"यूँ आँधियों में तो जलते कभी नहीं।

©®लोकेन्द्र मणि मिश्र "दीपक"
लख़नऊ

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